Language Selection

Get healthy now with MedBeds!
Click here to book your session

Protect your whole family with Orgo-Life® Quantum MedBed Energy Technology® devices.

Advertising by Adpathway

         

 Advertising by Adpathway

गणेशजी का नाग उनके मूषक का शिकार क्यों नहीं करता?

6 months ago 88

PROTECT YOUR DNA WITH QUANTUM TECHNOLOGY

Orgo-Life the new way to the future

  Advertising by Adpathway

गणेशजी की एक उपाधि लम्बोदर है। उनका उदर समृद्धि और प्रचुरता का प्रतीक है। उनका गज का सर हममें शक्ति की भावना उत्पन्न करता है। उनका वाहन एक मूषक है, जो बाधाओं को पार करके गोदामों तक पहुँचकर अनाज जमा करने के लिए जाना जाता है। मूषकों को पकड़ना कठिन होता है। रोचक बात यह है कि गणेशजी के उदर के चारों ओर एक नाग लिपटा हुआ है। आम तौर पर नाग मूषकों का शिकार करते हैं। इसके बावजूद, गणेशजी निश्चिंत दिखाई देते हैं। उनके हाथ में सिक्कों की थैली के आकार का मोदक होता है। लेकिन गणेशजी का मूषक उस मोदक में कोई रूचि नहीं दिखाता।

यहाँ, गज का सर तथा उदर शक्ति और प्रचुरता का प्रतीक है। दूसरी ओर, नाग मूषक को और मूषक मोदक को नहीं खा रहा है, जो संतुष्टता का संकेतक है। ऐसा प्रतीत होता है कि गणेशजी अपने एक हाथ से श्रद्धालुओं को सिक्कों की थैली जैसे दिखने वाला मोदक दे रहें हैं। उनका दूसरा हाथ ऊपर की ओर अभय मुद्रा में है। इस प्रकार, गणेशजी समृद्ध, शक्तिशाली और संतुष्ट होने के साथ-साथ अपने श्रद्धालुओं को सुरक्षित भी रखते हैं और उनका पोषण भी करते हैं। उनमें एक आदर्श यजमान की सभी विशेषताएं हैं।

शिवजी और उनके परिवार की प्रतिमा में भी ऐसा ही विचार दोहराया जाता है। शिवजी, अपनी पत्नी, पार्वती, और उनके दो पुत्रों, गणेश और कार्तिकेय, सहित कैलाश पर्वत पर बैठें हैं। चारों के अपने-अपने वाहन हैं — शिवजी का नंदी बैल, पार्वती का बाघ, गणेशजी का मूषक और कार्तिकेय का मोर। और शिवजी के गले में नाग लिपटा हुआ है।

कैलाश पर्वत पथरीली और बर्फ़ीली जगह है, जहाँ घास तक नहीं उगती। तो फिर यह प्रश्न स्वाभाविक है कि नंदी बैल क्या खाता है? और नंदी बैल पार्वती के बाघ को देखकर क्यों नहीं डरता? कार्तिकेय का मोर शिवजी के नाग पर वार क्यों नहीं करता और नाग गणेशजी के मूषक को क्यों नहीं खाता? इस प्रतिमा में भी सभी संतुष्ट दिखाई देते हैं। गणेशजी का उदर हमें याद दिलाता है कि यहाँ समृद्धि है। कार्तिकेय का भाला शक्ति का प्रतीक है। भभूत से लिप्त शिवजी के शरीर से हमें पता चलता है कि उनकी कोई संपत्ति नहीं है, बावजूद इसके कि उनकी पत्नी, पार्वती, पर्वतों की निवासी हैं।

दोनों ही प्रतिमाओं से एक सरल विचार संचारित किया जा रहा है। हिंसा से भय निर्माण होता है। और हिंसा भूख के कारण उत्पन्न होती है। भूख मिटाने के लिए हिंसक बनना अनिवार्य है। शिवजी की उपस्थिति में, कोई भूखा नहीं रहता। इसलिए, बाघ नंदी बैल का शिकार नहीं करता और नंदी बैल घास नहीं चरता। मोर नाग का शिकार नहीं करता और नाग मूषक को नहीं खाता। और मूषक गणेशजी के हाथ में रखा मोदक नहीं खाता। फलस्वरूप, कार्तिकेय को गणेशजी के मोदक, उनके मूषक या शिवजी के नाग को सुरक्षित रखने के लिए अपने भाले का प्रयोग नहीं करना पड़ता।

यह प्रतिमा धार्मिक प्रतिमा भले ही हो, लेकिन वास्तव में वह हमें भूख, अन्न और हिंसा पर सोचने के लिए विवश करती है। जीवन में भूख महत्त्वाकांक्षा का रूप लेती है। और हमारे लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हम हिंसक, लड़ाकू और प्रतिद्वंद्वी बन जाते हैं।

संस्कृति में हिंसा प्रकृति में हिंसा से अलग होती है। यह इसलिए कि मनुष्यों में न केवल शारीरिक भूख होती है बल्कि मानसिक और सामाजिक भूख भी होती है। अन्य जीवों की तरह हम भी जीवित रहने के लिए खाद्य पदार्थ चाहते हैं। लेकिन इसके अलावा हमारी मानसिक भूख भी होती है। हम चाहते हैं कि लोग हमें ध्यान दें और हमारा आदर करके हमारी प्रशंसा करें। इस मानसिक भूख को मिटाने के लिए हममें सामाजिक भूख उत्पन्न होती है। हम धनवान, शक्तिशाली और ज्ञानी बनना चाहते हैं।

अन्य जीवों की भूख के विपरीत मनुष्यों की भूख के पीछे कल्पनाशक्ति होती है और इसलिए वह कभी मिटती नहीं है। इसलिए, धनवान, शक्तिशाली और ज्ञानी व्यक्ति अपनी सफलताओं से कभी संतुष्ट नहीं होते हैं। समाज में भी यह विचार दोहराया जाता है कि केवल आलसी लोग संतुष्ट होते हैं। और इसलिए, विश्व में हिंसा और प्रतिद्वंद्व बने रहते हैं।

Read Entire Article

         

        

Start the new Vibrations with a Medbed Franchise today!  

Protect your whole family with Quantum Orgo-Life® devices

  Advertising by Adpathway